स्वामी विवेकानन्द के अनमोल विचार

स्वामी विवेकानन्द के अनमोल विचार

स्वामी विवेकानंद की जीवनी (1863-1902)

आज हम आपको स्वामी विवेकानन्द के अनमोल विचार के बारे में बताने से पहले उनके बचपन और उनकी अनमोल ष्क्षिा तथा उनके अनमोल भाशण के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

स्वामी  विवेकानन्द का बचपन

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावषाली गुरू थे। उनका पूरा नाम नरेन्द्र दत्ता (बचपन का नाम) था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्त के एक कायस्थ परिवार मे हुआ था। उनकी माता भुवनेषवरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। उनके पिता कलकत्त हाइकोर्ट के प्रसिद्ध वकील थे नरेन्द्र के दादा दुर्गाचरण संस्कृत और फारसी के विद्वान थे उनका पारिवारिक माहौल धार्मिक था नरेन्द्र बचपन से ही बूुद्धिमान और षरारती थे वह बच्चों के साथ-साथ अपने अध्यापकों से भी षरारत करने का मौका नही छोड़ते थे।

विवेकानन्द की षिक्षा

1871 में आठ साल की उम्र में नरेन्द्र ने ईष्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटल संस्थान में दाखिला लिया जहाॅं वे स्कूल गए। उन्होने प्रेसीडेन्सी कालेज प्रवेष परीक्षा मेें प्रथम डिवीजन अंक प्राप्त किये वे इतिहास दर्षन,धर्म,इतिहास,सामाजिक विज्ञान,साहित्य आदि विशयों के उत्साही पाठक थे। नरेन्द्र ने डेविड हयूम, इमैनुएल कांट, जोहान.जी.फिच,इन्होने जाॅन स्टुअअर्ट मिल और चाल्र्स डार्विन के कामों का अध्ययन किया और उन्होने स्पंेसर की किताब ;म्कनबंजपवदद्ध . 1861 का बंगाली में अनुवाद किया।

स्वामी विवेकानन्द द्वारा दिया गया एक अनमोल वचन –

अध्यात्म.विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगाश् यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था।
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥
जो कोई मेरी ओर आता है.चाहे किसी प्रकार से हो.मैं उसको प्राप्त होता हूँ। लोग भिन्न मार्ग द्वारा प्रयत्न करते हुए अन्त में मेरी ही ओर आते हैं।
विवेकानन्द की यात्राऐं

विवेकानन्द ने 25 वर्श की उम्र में ही गेरूआ वस्त्र धारण कर लिया और पैदल ही पूरे भारत वर्श की यात्राऐं की तथा स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका में एक प्रमुख भाशण दिया जिससे देष का मान देष ही नही अपितु विदेष में भी ऊॅंचा हुआ।

स्वामी विवेकानन्द के अनमोल विचार

विवेकानन्द के महत्वपूर्ण अनमोल वचन (षब्द)

1. उठो जागो और रूको नही तब तक जबतक कि आप की मंजिल न प्राप्त हो जाए।

2. तूफान मचा दो अर्थात व्यक्ति को अपने लक्ष्य की ओर धीरे.धीरे अग्रसर पड़ रहा है।

3. पवित्रता और दृढ़ता अर्थात पवित्रता उद्यमता और दृढ़ता यह चीजें मैं एक साथ चाहता हॅं।

4. एक षब्द में यह आदर्ष की तुम परात्मा हो।

5. अनुभव ही षिक्षक है अर्थात जबतक जीना, तबतक सीखाना।

6. जबतक आप खुद पर विष्वास नही करते तबतक आप भगवान पर विषवास नही कर सकते।

7. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करें तो इसका कुछ मूल्य है अन्यथा ये सिर्फ बुराई का एक ढेेर है तथा इससे जितनी जल्दी छुटकारा मिल जाए उतना ही बेहतर है।

8. ज्ञान तथ अविश्कार. ज्ञान स्वयं में वर्तमान है और मनुश्य सिर्फ उसका अविश्कार करता है।

9. वह व्यक्ति अमरत्व होजाता है किसी संासारिक वस्तु से व्याकुल नही होता है।

10. मस्तिश्क पर अधिकार. जब कोई विचार व्यक्ति के मस्तिश्क पर अधिकार कर लेता है तभी वह वास्तविक भौतिक अवस्था में परिवर्तित हा पाता है।

स्वामी विवेकानन्द के यह सभी अनमोल वचन व्यक्तियों के लिए पे्रणादायी है

विवेकानन्द का ष्किागो भाशण

एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें अमेरिकी सभा में भाशण देने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
डनके भाशण का कुछ अंष इस प्रकार है –
मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनो,
आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं। संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।

विवेकानन्द की मृत्यु

स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु उनके षिश्यों के अनुसार 4 जुलाई को 1902 को ध्यानवस्था में ही संसार को छोड़कर महासमाधि ले ली।
वर्तमान में उनके अनमोल वचन मार्गदर्षक के रूप में प्रेणादायी हैं।

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