देश भक्ति कविताएँ, नारे | 10 Desh Bhakti Kavita/ Poem, slogans in Hindi

Yeh desh hai mera poem in hindi

Desh Bhakti Kavita

On 15 August 1947, Jawaharlal Nehru became the first Prime Minister of India. The Respected Prime Minister hoists the Indian national flag above the Lahori Gate of the Red Fort in Delhi. Then this subsequently became a custom and on every Independence Day, Indian Prime Minister hoists the national flag and addresses the nation.

So, Independence Day is massively amped up the amount of catastrophe on screen. It showed the world that disaster movies could be bigger, badder, and more entertaining than ever before.

On this Independence Day we have bought some beautiful collection of Desh Bhakti Kavita in hindi of multi talented people who wrote out their love for nation in form of some beautiful lines. These Desh Bhakti Kavita in hindi are a collection from different writers and for everyone example school students, kids, elders. You can share these desh bhakti kavita to your loved ones greeting them freedom on 15th August Independence Day. You all can share them on whatsapp, Facebook.

Sharing your love for nation is a beautiful feeling of patriotism so let’s do it by sharing these beautiful verses. We have bought a collection of top 10 desh bhakti kavita in Hindi (our mother tongue), it gives immense pleasure to celebrate our freedom day.

desh bhakti par kavita

Desh Bhakti Kavita in Hindi

तब विद्रोह जरुरी है (अभिषेक मिश्र) | देश भक्ति कविताएँ 

desh bhakti kavita in hindi

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है

जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है

जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी ह

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है

जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है


हिंदू, हिंदी, हिंदोस्तान (अशोक कुमार वशिष्ठ)| देश भक्ति कविताएँ हिंदी में 

desh bhakti kavita

अपने धर्म, देश, भाषा की, जो इज़्ज़त करते हैं,

धर्म, देश और भाषा प्रेमी, सब उनको कहते हैं।

हिंदू, हिंदी, हिंदोस्तान, ये पहचान हैं मेरी,

तीनों ही मुझमें रहते हैं, तीनों जान हैं मेरी,

जहाँ भी रहता हूँ ये मेरे, साथ-साथ रहते हैं।

अपनी सभ्यता, संस्कृति से, मैंने वो पाया है,

इस धरती से, उस अंबर तक, जो सबसे प्यारा है,

जिसको पाने की कोशिश में, सारे ही मरते हैं।

भारत कह लो, इंडिया कह लो, या फिर हिंदोस्तान,

मेरी आँखें उसी तरफ़ हैं, उसी तरफ़ है ध्यान,

तन से रूह, उसके गुण गाते, उसमें ही बसते हैं।


विजय मिली विश्राम न समझो (बलवीर सिंह रंग)| Veerta ki kavita in hindi

veerta ki kavita in hindi

ओ विप्लव के थके साथियों
विजय मिली विश्राम न समझो
उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे
पूरा अपना काम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का
युगारंभ के प्रथम चरण की
गतिविधि को परिणाम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर
समर शेष है सजग देश है
सचमुच युद्ध विराम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो


घाटी मेरे देश की (नीरज पांडेय) | Desh Bhakti kavita in hindi

desh bhakti ki kavita

नदी, झील, झरनों की झाँकी मनमोहक है,
सुमनों से सजी घाटी-घाटी मेरे देश की।
सुरसरिता-सी सौम्य संस्कृति की सुवास,
विश्व भर में गई है बाँटी मेरे देश की।
पूरी धऱती को एक परिवार मानने की,
पावन प्रणम्य परिपाटी मेरे देश की।
शत-शत बार बंदनीय अभिनंदनीय,
चंदन से कम नहीं माटी मेरे देश की।।

कान्हा की कला पे रीझकर भक्ति भावना
के, छंद रचते हैं रसखान मेरे देश में।
तुलसी के साथ में रहीम से मुसलमान,
है निभाते कविता की आन मेरे देश में।

बिसमिल और अशफाक से उदाहरण,
साथ-साथ होते कुरबान मेरे देश में।
जब भी ज़रूरत पड़ी है तब-तब हुए,
एक हिंदू व मुसलमान मेरे देश में।

 


आज़ादी | Azadi ke upar kavita

azadi ke upar kavita

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।

लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।

व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।

हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।

जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।

प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।

हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।

उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।

हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।

सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।

लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।

व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।

हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।

जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।

प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।

हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।

उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।

हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।

सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।


Jab Bharat Azaad hua tha | Swatantrata par desh bhakti kavita in hindi

Swatantrata par kavita

जब भारत आज़ाद हुआ था

जब भारत आज़ाद हुआ था|

आजादी का राज हुआ था||

वीरों ने क़ुरबानी दी थी|

तब भारत आज़ाद हुआ था||

भगत सिंह ने फांसी ली थी|

इंदिरा का जनाज़ा उठा था||

इस मिटटी की खुशबू ऐसी थी

तब खून की आँधी बहती थी||

वतन का ज़ज्बा ऐसा था|

जो सबसे लड़ता जा रहा था||

लड़ते लड़ते जाने गयी थी|

तब भारत आज़ाद हुआ था||

फिरंगियों ने ये वतन छोड़ा था|

इस देश के रिश्तों को तोडा था||

फिर भारत दो भागो में बाटा था|

एक हिस्सा हिन्दुस्तान था||

दूसरा पाकिस्तान कहलाया था|

सरहद नाम की रेखा खींची थी||

जिसे कोई पार ना कर पाया था|

ना जाने कितनी मायेरोइ थी,

ना जाने कितने बच्चे भूके सोए थे,

हम सब ने साथ रहकर

एक ऐसा समय भी काटा था||

विरो ने क़ुरबानी दी थी

तब भारत आज़ाद हुआ था||


सपनों का भारत | Sapno ka Bharat desh bhakti kavita in hindi

Sapno ka Bharat poem in hindi

आज़ादी के साल हुए कई,
पर क्या हमने पाया है.

सोचा था क्या होगा लेकिन,
सामने पर क्या औया है.

रामराज्य-सा देश हो अपना
बापू का था सपना,
चाचा बोले आगे बढ़ कर
कर लो सब को अपना.

आज़ादी फिर छीने न अपनी
दिया शास्त्री ने नारा,
जय-जयकार किसान की अपनी
जय जवान हमारा.

सोचो इनके सपनों को हम
कैसे साकार करेंगे,
भ्रष्टाचार हटा देंगे हम
आगे तभी बढ़ेंगे.

मुश्किल नहीं पूरा करना
इन सपनों का भारत,
अपने अन्दर की शक्ति को
करो अगर तुम जाग्रत.

आओ मिलकर कसम ये खायें,
ऐसा सभी करेंगे,
शिक्षित हो अगर हर बच्चा,
उन्नति तभी हम करेंगे.


देश मेरा यह | Yeh desh hai mera poem in hindi

Yeh desh hai mera poem in hindi

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

पर्वत ऊँचे ऊँचे इसके
करते हैं रखवाली|

लंबी लंबी नदियाँ इसकी
फैलाएँ हरियाली|

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

झर-झर करते निर्मल झरने
गीत ख़ुशी के गाएं|

सर सर करती हवा चले तो
पेड़ खड़े लहराए…

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

बारी-बारी रितुए आतीं
अपनी छटा दिखलाती

फल-फूलों से भरे बगीचे
चिड़ियाँ मीठे गीत सुनाती,

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

कितना प्यारा देश हमारा
सबको है यह भाता,

इस धरती का बच्चा-बच्चा
गुन इसके है गाता,

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

Desh Bhakti Slogans in hindi

“बड़ा ही गहरा दाग़ है यारों जिसका ग़ुलामी नाम है, उसका जीना भी क्या जीना जिसका देश ग़ुलाम है!”

indian patriotic slogans in hindi

 

“दोनों ही करते है कुर्बान, माँ ममता को, जान को जवान इसीलिए तो है मेरा भारत महान |”

slogan in hindi

“वीर चले है देखो लड़ने, दुश्मन से सरहद पर भिड़ने |”

slogan on desh bhakti

“कुछ कर गुजरने की गर तमन्ना उठती हो दिल में, भारत मा का नाम सजाओ दुनिया की महफिल में |”

We will update this section soon, stay tuned with us as Independence Day 2018 is approaching!

Share Desh Bhakti kavita in Hindi with your friends & family ! enjoy!

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